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शकरकंद की खेती (Shakarkand Ki Kheti) या SweatPotato Farming in Hindi आदि की विस्तार से जानकारी. शकरकंद को भारत में ही नहीं बल्कि कई जगह पर बोया जाता है शकरकंद…
बैंगन की खेती भी अपने देश में अधिक मात्रा में की जाती है और इसको भी विभिन्न प्रकार की जलवायु में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है और इसी कारण से अब तो एक वर्ष में बैंगन की तीन तीन फसलें भी ली जाती हैं अगर आप भी बैंगन की खेती करने की सोच रहे हैं तो यह ध्यान में रखना होगा कि बैंगन की उन्नत किस्में ही बोएं इसी कारण से आगे हम बैंगन की उन्नत किस्में (Baingan ki unnat kisme) आदि के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करेंगे जिससे आप अधिक मुनाफा भी कमा सकें.
आलू की खेती हमारे देश में कितनी की जाती है और आप भी शायद आलू की खेती करते हैं या करने की सोच रहे हैं इसलिए इस पोस्ट को पढ़ने आए हैं इस पोस्ट में हम आलू की उन्नत किस्में आदि के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करेंगे
किसान मित्रों कम्पोस्ट खाद भाग 3 में कम्पोस्ट खाद बनाने की नाडेप या आधुनिक विधि (Compost khad banane ki nadep ya adhunik vidhi) के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल…
कम्पोस्ट खाद बनाने की बंगलौर विधि (Compost khad banane ki bangalore vidhi) आदि के बारे में जानकारी. किसान मित्रों कम्पोस्ट खाद भाग 1 में हमनें कम्पोस्ट खाद बनाने के साधन…
किसान मित्रों घास - पत्ते, मल - मूत्र इत्यादि वस्तुओं को सड़ाकर खाद बनाने के ढंग को कम्पोस्टिंग कहते हैं और इस तरह तैयार हुआ खाद कंपोस्ट खाद कहलाता है तो आइए इस कम्पोस्ट खाद के पहले भाग में हम कम्पोस्ट खाद बनाने के साधन और कंपोस्ट खाद बनाने का स्थान के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करेंगे.
कपास एक नकदी फसल हैं कपास को सफेद सोना भी कहते हैं संपूर्ण विश्व में कपास की दो किस्में बहुत प्रचलित हैं देशी कपास (Desi Kapas) और अमेरिकन कपास (American Kapas). आज हम देशी कपास और अमेरिकन कपास के बीच सभी अंतर और आपको कौन सी किस्म का बीज बोना चाहिए और कई लोगों का सवाल भी होता है कि देशी कपास और अमेरिकन कपास के बीच अंतर लिखिए आदि जानेंगे.
अगर आप अच्छी उन्नत किस्में बोते हैं तो आपको अच्छा उत्पादन मिलता है और अच्छे उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमाया जाता है और यही बात कपास पर भी लागू होती है इसीलिए आज के इस पोस्ट में हम कपास की उन्नत किस्मों के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करेंगे.
दूध के उत्पादन में इस नस्ल की गायों को साहीवाल गायों के बाद रखा गया है लाल सिंधी नस्ल के पशु विभिन्न प्रकार की भूमि और जलवायु में अपने अनुकूलन की क्षमता रखते हैं और ये पशुओं में होने वाली कई बीमारियों के प्रतिरोधी भी हैं इसलिए इस पोस्ट में हम लाल सिंधी गाय के बारे में विस्तार से जानेंगे.