bhindi ki kheti। भिंडी की खेती। okra ki kheti।

इस ब्लॉग पोस्ट में bhindi ki kheti या भिंडी की खेती या okra ki kheti bhindi ki kheti kaise karen या भिंडी की खेती कब करें के बारे में जानकारी देंगे।

भिंडी की खेती के बारे में पूरी जानकारी जानने से पहले हमें यह जानना चाहिए कि भिंडी को सब्जी बनाने के अलावा इसकी पत्तियों का रस औषधियों में काम आता है और भिंडी के डंठल को कुचल कर गुड़ व शक्कर को साफ करने के लिए एक चिकना लसलसा घोल तैयार किया जाता है।

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भिंडी की खेती के लिए जलवायु (bhindi ki kheti ke liye jalvayu):-

भिंडी की खेती को गर्म मौसम में किया जाता है क्योंकि भिंडी को पाले से बहुत ज्यादा नुकसान होता है इसी कारण से उत्तरी भारत में भिंडी की खेती को सर्दियों के मौसम में नहीं किया जाता है भिंडी के बीज को अच्छे जमाव के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है लगातार बारिश होना भिंडी की फसल के लिए नुकसानदायक होता है।

भिंडी की खेती के लिए भूमि (bhindi ki kheti ke liye bhumi):-

भिंडी की खेती को लगभग सभी तरह की मिट्टियों में किया जा सकता है लेकिन भिंडी की अच्छी पैदावार के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी बहुत अच्छी मानी जाती है अगर आप भारी भूमि में भिंडी की खेती करना चाहते हैं तो अच्छे जल निकास तथा पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद के प्रयोग से आप भिंडी की खेती आसानी से कर सकते हैं और अगर उचित pH मान की बात करें तो 6 से 7 के बीच pH मान भिंडी की खेती के लिए अच्छा माना जाता है।

भिंडी की खेती के लिए भूमि की तैयारी (bhindi ki kheti ke liye bhumi ki taiyari):-

भिंडी की खेती करने के लिए खेत को एक बार मिट्टी पलट हल से जोतना चाहिए और इसके बाद में दो तीन बार हैरो या देशी हल से जुताई करके पाटा लगा देना चाहिए और इसके साथ ही साथ पानी के निकास का उचित प्रबंध करना चाहिए।

भिंडी की किस्में (bhindi ki kisme):-

भिंडी की उपज अच्छी लेने के लिए यहां कुछ महत्वपूर्ण भिंडी की किस्मों की जानकारी दी गई है।

कल्याणपुर टाइप-1, कल्याणपुर टाइप-2, कल्याणपुर टाइप-3, कल्याणपुर टाइप-4, पूसा सावनी, पूसा मखमली, हरभजन भिंडी, पंजाब पद्मिनी, परभनी क्रांति, पंजाब नंबर-13, अर्का अनामिका, पार्किंस लांग ग्रीन, पूसा स्वामी, आजाद गंगा, आजाद कृष्णा, हिसार उन्नत, वर्षा उपहार, आदि।

भिंडी बोने का समय और भिंडी बीज की मात्रा (bhindi bone ka samay aur bhindi beej ki matra):-

भिंडी की आमतौर पर मुख्य रूप से दो फसलें ली जाती हैं।

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वर्षाकालीन फसल (varshakalin fasal):-

भिंडी की वर्षाकालीन बुवाई जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के मध्य तक की जाती है इस ऋतु में भिंडी उगाने के लिए 10 से 12 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहता है।

ग्रीष्मकालीन फसल (grishmkalin fasal):-

भिंडी की ग्रीष्मकालीन बुवाई 15 फरवरी से मार्च के दूसरे सप्ताह तक जरूर कर देनी चाहिए इस फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 18 से 20 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है।

लगातार भिंडी प्राप्त करने के लिए भिंडी की बुवाई इस मौसम में 10 से 15 दिन के अंतर से कई बार की जा सकती है और पहाड़ों पर भिंडी अप्रैल से जुलाई तक बोई जाती है।

भिंडी का बीज उपचार (bhindi ka beej upchar):-

भिंडी के बीज को बोने से पहले 15 से 20 घण्टे साफ पानी में भिगो देना चाहिए जो बीज कटे हुए और हल्के होते हैं वह पानी की सतह पर तैरने लगते हैं उनको निकल कर अलग कर देना चाहिए इसके बाद भिंडी के बीजों को निकालकर छाया में एक दो घण्टे सूखने देना चाहिए इसके बाद बाविस्टिन या कैप्टान नामक रसायन से 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज को शोधित करना चाहिए ताकि जो शुरुआत में भिंडी की फसल में बीमारियां लगती हैं उनसे रक्षा हो सके।

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भिंडी के बीज बोने की विधि और दूरी (bhindi ke beej bone ki vidhi aur duri):-

गर्मी की फसल के लिए पौधे से पौधे की दूरी और कतार की दूरी वर्षा ऋतु की फसल से कम रखनी चाहिए क्योंकि इस मौसम में पौधों की बढ़ोतरी कम होती है भिंडी के बीज को 2.5 सेमी• की गहराई पर बोना चाहिए अधिक गहराई पर बोया गया बीज कम जमता है।

भिंडी की खेती के लिए खाद और उर्वरक (bhindi ki kheti ke liye khad aur urvarak):-

भिंडी की खेती करते समय मिट्टी की जांच कराकर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए और यदि मिट्टी की जांच न हो सके तो 80kg. नाइट्रोजन, 50kg. फास्फोरस, 50kg. पोटाश प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालना चाहिए नाइट्रोजन की आधी मात्रा और पोटाश तथा फास्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई से पहले खेत में डाल देनी चाहिए और नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा को बुवाई के 35 से 40 दिन बाद खड़ी फसल में टॉप ड्रेसिंग कर देनी चाहिए।

यदि भूमि भारी किस्म की है तो आखिरी जुताई के पहले 200 कुंतल सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिला देनी चाहिए।

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भिंडी की खेती में सिंचाई (bhindi ki kheti me sinchai):-

भिंडी की खेती करते समय अगर खेत में अंकुरण के समय नमी कम हो और पलेवा न कर सकते हों तो बुवाई के तुंरत बाद ही सिंचाई कर देनी चाहिए ताकि पौधों का जमाव अच्छा हो सके भिंडी के पौधे उगने के बाद गर्मी की फसल में सप्ताह में एक बार सिंचाई जरूर करनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा नहीं करते हैं तो गर्मी की फसल में फलियां सख्त होने लगती हैं बरसात के मौसम में यदि बहुत समय तक वर्षा न हो तो जरूरत के अनुसार सिंचाई करते रहना चाहिए और भिंडी की फसल में भरे हुए पानी को निकालते रहना चाहिए नहीं तो पौधे पीले पड़कर मर सकते हैं।

यह भी पढ़ें:- अप्रैल में बोई जाने वाली फसल। april me boi jane wali sabji।

भिंडी की खेती में खरपतवार और उनका नियंत्रण (bhindi ki kheti me kharpatwar aur unka niyantran):-

भिंडी की खेती चाहें गर्मी में की गई हो या खरीफ में उसमें मौसमी खरपतवारों की समस्या बनी ही रहती है और ये खरपतवार भिंडी की फसल को बहुत हानि पहुंचाते हैं भिंडी के पौधे अपने जीवनकाल के 30 से 40 दिन तक यदि खरपतवार रहित रह जाएं तो इसके बाद खरपतवार भिंडी की फसल पर कोई ज्यादा कुप्रभाव नहीं डालते हैं अतः पौधे की शुरुआती अवस्था में दो से तीन बार निराई गुड़ाई करनी चाहिए और बारिश के मौसम में पौधों पर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए ताकि पौधे हवा आदि से न गिरने पाएं और उनकी जड़ों के पास पानी जमा न हो सके।

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खरपतवारनाशी दवाओं के प्रयोग करने से भी खरपतवारों को नष्ट किया जाता है खेत की अंतिम जुताई के बाद भिंडी की बुवाई से पहले बेसालिन नामक रसायन की 1.0 किलोग्राम सक्रिय अवयव की मात्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़कने के बाद हैरो आदि से मिट्टी में मिला देने पर खरपतवारों का अच्छा नियन्त्रण हो जाता है इससे खरपतवारों के बीज अंकुरित नहीं होते हैं यदि लासो या टोक ई•-25 उपलब्ध हो तो उनका बुवाई के बाद छिड़काव किया जा सकता है लासो की 2 किलोग्राम सक्रिय अवयव तथा टोक ई•-25 की 1.5 किलोग्राम सक्रिय अवयव मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

भिंडी की खेती में रोग और उनका नियंत्रण (bhindi ki kheti me rog aur unka niyantran):-

भिंडी की फसल में मुख्य रूप से लगने वाले रोगों के लक्षण और उनकी रोकथाम के उपाय आगे दिए गए हैं।

भिंडी में पीला शिरा मोजैक (bhindi me pila shira mozak):-

पीला शिरा मोजैक एक वायरस से फैलने वाला रोग है यह भिंडी का सबसे ज्यादा फैलने वाला और हानिकारक रोग है जो पौधा पीला शिरा मोजैक से प्रभावित होता है उसकी पत्तियों की शिराएं पीली पड़कर गिर जाती हैं।

भिंडी में पीला शिरा मोजैक रोग की रोकथाम (bhindi me pila shira mozak rog ki roktham):-

भिंडी में पीला शिरा मोजैक रोग के लक्षण दिखाई देने पर रोगी पौधों को उखाड़कर जला देना चाहिए और साइपरमेथ्रिन 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में या नुवान 100 ई•सी• (1मिलीलीटर 2लीटर पानी में) का छिड़काव करना चाहिए पहला छिड़काव फसल बोने के 25 दिन बाद और अन्य दो छिड़काव 15 दिन के अंतर पर करना चाहिए।

भिंडी में उकठा रोग (bhindi me uktha rog):-

भिंडी में उकठा रोग के कारण पौधे जड़ से ही सूख जाते हैं पत्तियां मुरझा जाती हैं और कुछ समय बाद पूरा पौधा सूख जाता है।

भिंडी में उकठा रोग की रोकथाम (bhindi me uktha rog ki roktham):-

भिंडी में उकठा रोग की रोकथाम के लिए लंबी अवधि वाला फसल चक्र अपनाना चाहिए और रोगरोधी किस्में जैसे पंजाब नं•-123, पूसा सावनी आदि ही बोनी चाहिए।

भिंडी की खेती में कीट और उनका नियंत्रण (bhindi ki kheti me keet aur unka niyantran):-

भिंडी की फसल में बहुत से कीड़ों का आक्रमण होता है लेकिन हम यहां पर कुछ कीड़ों के बारे में ही जानकारी दे रहे हैं।

भिंडी में हरा तैला कीट (bhindi me hara taila keet):-

भिंडी में हरा तैला हरे-पीले रंग के छोटे छोटे कीड़े होते हैं जो पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं।

भिंडी में हरा तैला का नियंत्रण (bhindi me hara taila keet ka niyantran):-

भिंडी की फसल की शुरू की अवस्था में मैटासिस्टाक्स 25 ई•सी• या साइपरमेथ्रीन का 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं तथा हरा तैला कीट का अधिक प्रकोप होने पर इंडोसल्फान 35 ई•सी• का 0.2 प्रतिशत का अथवा सेविन 50 प्रतिशत घुलनशील का 0.2 प्रतिशत का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए।

यह भी पढ़ें:- मार्च में बोई जाने वाली फसलें। march me boi jane wali sabji।

भिंडी में चित्तीदार सुंडी कीट (bhindi me chittidar sundi keet):-

चित्तीदार सुंडी कीट के शरीर पर काले तथा भूरे धब्बे पाए जाते हैं जब भिंडी की फसल कुछ ही सप्ताह की होती है तो यह चित्तीदार सुंडी तने के ऊपरी भाग में छेद बनाकर तने के अंदर घुस जाती है जिसके कारण ऊपर का भाग सूखकर गिर जाता है।

भिंडी में चित्तीदार सुंडी कीट का नियंत्रण (bhindi me chittidar sundi keet ka niyantran):-

यदि भिंडी की फसल छोटी है और फूल नहीं लगे हैं तो उस समय 1-1.5 मिलीलीटर इंडोसल्फान 35 ई•सी• को 1 लीटर पानी के हिसाब से घोलकर फसल पर छिड़काव कर देना चाहिए और यदि भिंडी की फसल पर फूल और फलियां लगीं हों तो फलियों को तोड़ने के बाद 50 प्रतिशत घुलनशील मैलाथियान चूर्ण का छिड़काव करना चाहिए यह छिड़काव 15 दिन के अंतर से करना चाहिए और छिड़काव करने के 10 दिन बाद ही भिंडी की फलियों को तोड़ना चाहिए।

भिंडी में फलियों की तुड़ाई (bhindi me faliyo ki tudai):-

भिंडी की फलियां जब कोमल हो गई हों तो तोड़ लेनी चाहिए भिंडी की फलियों की पहली तुड़ाई भिंडी के फूल खिलने के 6 से 7 दिन बाद की जाती है और इसके बाद फलियों की तुड़ाई पहली तुड़ाई के 3 से 4 दिन के बाद की जाती है अगर भिंडी की फलियों को पौधे में अधिक समय तक लगे रहने दिया जाता है तो उनमें रेशे बन जाते हैं जिसके कारण वे कड़ी हो जाती हैं।

भिंडी की उपज (bhindi ki upaj):-

भिंडी की उपज मौसम, स्थान, किस्म और फलियों की तुड़ाई के ऊपर निर्भर करती है गर्मी की फसल से लगभग 50 से 60 कुंतल और वर्षा की फसल से 80 से 100 कुंतल उपज प्रति हेक्टेयर मिलती है।

भिंडी की विपणन की तैयारी (bhindi me vipdan ki taiyari):-

भिंडी की फलियों को तोड़ने के बाद क्षतिग्रस्त, सख्त और कीड़ों के द्वारा खाए हुए और छेद किए हुए भिंडी की फलियों को बाजार में भेजने से पहले अलग कर देना चाहिए ऐसा करने से उत्पादन का अच्छा मूल्य मिलता है।

भिंडी का भंडारण (bhindi ka bhandaran):-

भिंडी की फलियों को तोड़ने के बाद किसी छायादार स्थान में फैलाकर रखना चाहिए इनको खेत में लाते समय तथा रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रबर से दबकर भिंडी की फलियों में खरोंच न पड़े वैसे तो ताजी भिंडी की फलियों का मूल्य अच्छा मिलता है लेकिन अगर आप भंडारित करना चाहते हैं तो 0° सेल्सियस तापमान तथा 60 से 75 प्रतिशत नमी पर भिंडी को कुछ समय के लिए सुरक्षित भंडारित किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें:- टमाटर की खेती। tamatar ki kheti। tomato farming।

इस ब्लॉग पोस्ट में bhindi ki kheti या भिंडी की खेती या okra ki kheti bhindi ki kheti kaise karen या भिंडी की खेती कब करें के बारे में कुल मिलाकर आसान शब्दों में कहें तो हमनें भिंडी की खेती के बारे में पूरी जानकारी हासिल की।

भिंडी की खेती (bhindi ki kheti) से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए हैं।

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भिंडी की खेती कब करें या bhindi ki kheti ka time

भिंडी की खेती गर्म मौसम की फसल है क्योंकि भिंडी को पाले से बहुत हानि होती है।

भिंडी की खेती कैसे की जाती है या bhindi ki kheti kaise karen

भिंडी की खेती क्यारियों में बीज बोकर की जाती है भिंडी की खेती की पूरी जानकारी पाने के लिए इसे https://www.krishakjan.com/bhindi-ki-kheti पर पढ़ें।

भिंडी की खेती से कमाई

भिंडी की खेती से लगभग 1 एकड़ में 50 हजार रूपए से अधिक की कमाई की जा सकती है कमाई निम्न कारणों पर भी निर्भर करती हैभिंडी के बीज से कमाई, भिंडी की पत्तियों को औषधि कंपनी में बेचकर कमाई और भिंडी की फलियों को बाजार में बेचकर कमाई।

bhindi ki kheti January

जनवरी महीने में भिंडी की बुवाई करना फायदे का सौदा हो सकता है भिंडी की खेती की पूरी जानकारी पाने के लिए इसे https://www.krishakjan.com/bhindi-ki-kheti पर पढ़ें।

भिंडी कितने दिन में तैयार होता है?

भिंडी कितने दिन में तैयार होता है तो भिंडी औसत रूप से 115 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है।

1 एकड़ में भिंडी का बीज कितना लगता है?

1 एकड़ में भिंडी का बीज औसत रूप से 4 किलोग्राम लगता है और अगर हेक्टेयर की बात करें तो 1 हेक्टेयर में भिंडी का बीज 10 से 12 किलोग्राम लगता है।

भिंडी के बीज को कैसे लगाएं? या भिंडी का पेड़ कैसे लगाएं?

भिंडी के बीज कैसे लगाएं तो गर्मी के मौसम में लाइन से लाइन की दूरी 30 सेमी• और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी• रखी जाती है वहीं गमलों में गमलों को बढ़ते माध्यम में मिट्टी के साथ भरना चाहिए और एक गमले में 2 बीज बोना चाहिए और उभरे हुए बीजों को 2 x 2 फुट के अंतराल से 2 बीज प्रति स्थान पर रोप देना चाहिए।

लाल भिंडी की खेती कब करें?

लाल भिंडी की खेती आप जून-जुलाई और फरवरी-मार्च में आप कर सकते हैं।

भिंडी की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?

भिंडी की सबसे अच्छी किस्म में पूसा सावनी, पूसा मखमली, हरभजन भिंडी, पंजाब पद्मिनी, परभनी क्रांति, पंजाब नंबर-13, अर्का अनामिका, आदि आती हैं।

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