मशरूम में सफल महिला किसान की कहानी।

मशरूम में सफल महिला किसान की कहानी।

दोस्तों, किसान भाईयों नमस्कार आज हम आप सब लोगों के लिए एक ऐसे सफल किसान की कहानी लेकर आए हैं जिनसे आप भी काफी कुछ सीख सकते हैं और अगर आप इस लेख को पूरा पढ़ेंगे तो आप यहां से बहुत प्रेरित होकर जायेंगे।

भारत में एक बड़ी आबादी रोजगार की तलाश में पलायन करती है. अपना घर बार छोड़कर लोग दूसरे शहर में नौकरी करते हैं. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की स्थिति भी इससे अलग नहीं है. लेकिन अब एक आईटी प्रोफेशनल महिला के प्रयासों से राज्य के ग्रामीण इलाकों में ही रोजगार के अवसर बन रहे हैं।

आईटी प्रोफेशनल हिरेशा वर्मा मशरूम की खेती और उसके प्रोसेसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़कर लोगों को पैसा कमाने का मौका दे रही हैं. 2013 में अपने सर्वेंट क्वार्टर में हिरेशा वर्मा ने महज दो हजार रुपए की लागत से सीप यानी ऑयस्टर मशरूम के 25 बैग रखे. हिरेशा की पहली ही कोशिश जबरदस्त रही और 5 हजार रुपए की कमाई हुई।

ऑयस्टर मशरूम की खेती में मिली कामयाबी के बाद मिलकी यानी दूधिया मशरूम की खेती में भी वो सफल रहीं। इसके बाद हिरेशा ने देहरादून स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से प्रशिक्षण लिया और मशरूम की अलग-अलग किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त की व खेती के तरीके भी सीखे।

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उनके पास आधुनिक उत्पादन उपकरणों और सुविधाओं वाला फार्म है. 1000 किलो प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले इस फार्म में 10 एयर कंडीशन कमरे हैं। हिरेशा ने अभी तक 2000 महिलाओं और किसानों को मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया है। हिरेशा को उनकी कोशिशों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।

किसान भाईयों आपने आज एक सफल किसान की कहानी पढ़ी अगर आपको इससे कुछ प्रेरणा मिली हो और अगर आगे भी ऐसी ही सफल किसान भाईयों की कहानियां पढ़ना चाहते हैं और कृषि से सम्बंधित जानकारियां पाना चाहते हैं तो बाएं साइड (left side) में लाल घंटी के निशान को क्लिक करके सब्सक्राइब कीजिए।


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