अमेरिका में दबाव, भारतीय दालों की कीमत गिरेगी! जानें पूरा मामला

अमेरिका में दबाव, भारतीय दालों की कीमत गिरेगी! जानें पूरा मामला

भारत में दालों के उत्पादन में पिछले कई वर्षों में गिरावट आई है लेकिन उपभोग में नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला है जिसके लिए हमें दुनिया के कई देशों से दालों का आयात करना पड़ता है जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी भी है लेकिन भारत और अमेरिका के बीच इन दिनों कृषि और उससे जुड़े ट्रेड में काफी तनाव बना हुआ है. जहां अमेरिका की ओर से भारत से जाने वाले उत्पादों पर टैरिफ लगाया गया है वहीं भारत से भी कुछ कड़ा रुख़ देखने को मिला है और यही रुख़ भारत ने दालों पर भी अपनाया है.

भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों पर टैरिफ लगाया है जिसके कारण अमेरिका के किसानों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसके कारण अब यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंच गई है.

कब और कितना लगा टैरिफ

भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों पर 30 अक्टूबर 2025 को 30% टैरिफ लगाने की घोषणा की जिसके बाद 1 नवंबर 2025 से यह टैरिफ लागू हो गया जिसके बाद वहां के सीनेटर्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति को पत्र लिखा और टैरिफ हटवाने या कम कराने की मांग की.

दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट

दुनिया में सबसे ज्यादा दालों का सेवन भारत में ही किया जाता है हम दुनिया भर की लगभग 27% दालों का सेवन करते हैं जिसके कारण भारत दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बन जाता है.

अमेरिका के सबसे बड़े दाल उत्पादक राज्यों की मांग

अमेरिका के सबसे बड़े दाल उत्पादक राज्य मोन्टाना और नॉर्थ डॉरकेटा हैं जहां के सीनेट स्टीव डेंस और केविन क्रैमर हैं इन्होंने ही 16 जनवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर इस टैरिफ पर द्विपक्षीय व्यापार समझौते की और अनुकूल प्रावधान की माँग की है. साथ ही सीनेटर्स ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि 2020 में भी ऐसी ही मांग करने पर ट्रंप ने इन राज्यों को राहत दी थी.

क्या होगा इसका प्रभाव

हम सभी जानते हैं पिछले कई महीनों से भारत और अमेरिका के बीच कृषि और इससे जुड़े उत्पादों के ट्रेड को लेकर बहुत गर्मा-गर्मी बनी हुई है जिसके कारण यह मुद्दा इस आग को और हवा दे सकता है अगर ट्रंप इसमें टैरिफ कम करवाने में सफल हो गए तो भारतीय दाल किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि अमेरिकी दाल आने से, दालों के कीमत में गिरावट निश्चित है जिसके कारण इसका सीधा असर भारतीय किसानों की जेब पर होगा हालांकि उपभोक्ताओं को इसका फायदा देखने को मिल सकता है.

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