देश में हाल ही में खरीफ मौसम की फसलों की कटाई हुयी है और अब रबी मौसम की फसलों की बुवाई चल रही है लेकिन खरीफ मौसम की मुख्य फसल धान की कटाई के समय एक समस्या बहुत आम है और वो है इससे निकलने वाले पुआल/पराली को खेत में ही जला देना। और इस पराली जलाने में देश का नेतृत्व कई वर्षों तक पंजाब ने किया है क्योंकि वहां बहुत बड़े छेत्रफल पर धान की खेती भी होती है लेकिन इस बार पंजाब में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है. लेकिन उससे पहले जानते हैं पंजाब के उस गांव के बारे में जहाँ पिछले 6 वर्षों से पराली नहीं जलाई जा रही है
इस गांव में किसी ने 6 वर्षों से नहीं जलाई पराली
पंजाब का गांव, रणसिंह कलां; जहाँ 27 नवंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे जहाँ उन्होंने रणसिंह कलां गांव और पंजाब को बधाई दी है क्योंकि रणसिंह कलां गांव में पिछले 6 वर्षों से पराली नहीं जलाई गयी है बल्कि यहाँ के किसान पराली को मिटटी में ही दबाकर इस पर सीधी बुवाई कर देते हैं जिससे यह खेत को ताकत भी देता है और मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा को भी बढ़ाता है.
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में भारी गिरावट
पंजाब में इस बार पराली जलाने के मामलों में करीब 80 से 85 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गयी है जिससे पंजाब और देश के अन्य राज्यों में रहने वाले किसानों और अन्य सामान्य परिवारों को स्वास्थ्य का लाभ निश्चित रूप से पहुंचा है. पंजाब में जहाँ पिछले साल करीब 83,000 पराली जलाने के मामले थे वहीँ इस साल करीब 5000 मामले ही सामने आये हैं.
पराली जलाने के नुकसान
- खेत की ऊपरी सतह को कठोर बना देता है
- मिट्टी की गर्मी को बहुत बढ़ा देता है
- कुछ वर्षों बाद मिट्टी पूरी तरह अनुपजाऊ हो जाती है
- मिट्टी में उपस्थित लाभदायक जीवों जैसे केंचुआ आदि को मार देता है

